इसरो ने अंतरिक्ष में भेजा अपना जासूस, सीमा पर रात के अंधेरे में रखेगा पीएसएलवी-45 नजर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर पीएसएलवी-सी45 एमीसैट का एक रहस्यमय भारतीय जासूस को अंतरिक्ष में छोड़ा है. यह भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी और नई छलांग है. श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) का नया संस्करण सोमवार को उड़ान भर चुका है और यह अपने साथ रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस सैटेलाइट (एमीसेट) और 28 अन्य थर्ड-पार्टी उपग्रहों को ले गया है.

पहली बार इसरो ने एक साथ तीन अलग-अलग कक्षाओं में सैटेलाइट को स्थापित करने का इतिहास रचा है. यह पूरा अभियान 180 मिनट में पूरा हो जाएगा. एमसैट सैटेलाइट कई मायनों में भारत के लिए महत्वपूर्ण है. यह दुश्मन देशों पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाने में अहम भूमिका निभाएगा. भारत जुलाई या अगस्त में किसी समय अपने नए स्मॉल सेटेलाइट लांच व्हीकल (एसएसएलवी) रॉकेट से दो या ज्यादा रक्षा उपग्रहों को भी लांच करेगा.




सुबह 9.27 बजे उड़ान भरने के लगभग 17 मिनट बाद रॉकेट 749 किलोमीटर दूर स्थित कक्षा में 436 किलोग्राम के एमीसेट को प्रक्षेपित किया गया .

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, ‘सामरिक क्षेत्रों से उपग्रहों की मांग बढ़ गई है. लगभग छह या सात उपग्रहों के निर्माण की योजना है.’
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एमीसेट को कक्षा में रखकर रॉकेट 28 विदेशी उपग्रहों (अमेरिका के 24, लिथुआनिया के दो और स्पेन तथा स्विट्जरलैंड के एक-एक उपग्रह) को 504 किलोमीटर की ऊंचाई पर प्रक्षेपित करने के लिए वापस आएगा. इन सभी 28 उपग्रहों का वजन लगभग 220 किलोग्राम है.



ऐसा करने के बाद भारत कुल 297 विदेशी उपग्रहों को कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर लेगा.




एमीसैट रात के अंधेरे में रखेगा भारतीय सीमा पर नजर


इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस सैटेलाइट(एमीसैट) भारतीय सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधियों पर नजर रखने का काम करेगा. यह बॉर्डर पर सैटेलाइट रडार और सेंसर की मदद से हर हरकत पर नजर रखेगा. यही नहीं इस सैटेलाइट रात के अंधेरे में भी तस्वीरें खींचने में सक्षम है.
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डीआरडीओ के वैज्ञानिकों द्वारा स्वदेश में निर्मित 436 किलोग्राम वजन वाली इस सैटेलाइट से भारतीय सर्विलांस मजबूत बनेगा और पृथ्वी की 749 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित होने के कारण यह रडार नेटवर्क की निगरानी भी करेगा.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सैटेलाइट के जरिए अंतरिक्ष में विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम की जांच की जा सकेगी और इससे दुश्मन के हथियारों और सैन्य पूंजी के बारे में पता भा लगाया जा सकेगा.

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