अमेठी में हार के भय से उस सीट पर भागे राहुल जहाँ हिन्दू 50% से कम है और मुस्लिम+इसाई 50% से ज्यादा

राहुल गाँधी अंततः अमेठी में हार के डर से केरल की वायनाड सीट पर भाग खड़े हुए है, अमेठी सीट के अलावा वो केरल की वायनाड सीट से भी लोकसभा 2019 का चुनाव लड़ेंगे

राहुल गाँधी अमेठी में स्मृति ईरानी की उम्मेदवारी से खौफ में है, और कांग्रेस में तभी से बेचैनी बढ़ गयी थी जब से बीजेपी ने अमेठी सीट पर फिर स्मृति ईरानी के नाम का ऐलान किया था




असल में अमेठी में कोई विकास नहीं हुआ, और यहाँ से 15 सालों से राहुल गाँधी ही सांसद थे, जिसमे से केंद्र में 10 सालों तक राहुल गाँधी की ही सरकार थी, पर हाल ये है की अमेठी उत्तर प्रदेश का सबसे पिछड़ा इलाका है

अमेठी में प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश में सबसे कम है, और ये सिर्फ यूपी का ही नहीं बल्कि देश का सबसे पिछड़ा जिला है, जो इस हाल में है जैसे 1970 के ज़माने में चल रहा हो

स्मृति ईरानी लगातार इस सीट पर काम करती आई है, और अमेठी में वर्तमान में राहुल गाँधी के खिलाफ जनता के मन में जबरजस्त गुस्सा है, ऐसा की राहुल गाँधी को ये खौफ है की स्मृति ईरानी उन्हें 2-3 लाख वोटों से भी अमेठी में हरा सकती है
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कांग्रेस राहुल गाँधी के लिए पहले कर्णाटक में एक सेफ सीट खोज रही थी, पर आज 31 मार्च को कांग्रेस ने ऐलान कर दिया की राहुल गाँधी केरल की वायनाड सीट पर भी चुनाव लड़ेंगे

वायनाड सीट पर 2011 के अनुसार हिन्दू जनसँख्या 50% से कम है, वहीँ मुस्लिम+इसाई जनसँख्या 50% से ज्यादा है, और ये 2011 के आंकड़े है, आज 2019 की स्तिथि ये है की यहाँ हिन्दू 44% है, जबकि मुस्लिम+इसाई 55% से ज्यादा




खुद को जनेउधारी घोषित कर चुके राहुल गाँधी एक मुस्लिम+इसाई बहुसंख्यक सीट पर भागे है, अब कांग्रेस वहां पर उनके फिरोज खान कनेक्शन और अंतोनिया माइनो (सोनिया गाँधी) वाले कनेक्शन पर मुस्लिम+इसाई वोटरों को खुश करके वोट मांगेगी

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