कैंसर से लड़ते हुए भी करते थे अपना कर्म, वापस आना पर्रीकर सर, आपके जैसे इमानदार और सरल नेता की है देश को जरुरत






मनोहर पर्रीकर सिर्फ एक नाम नहीं थे वो एक उदाहरण थे, मनोहर पर्रीकर को देखकर लोग राजनेताओं पर भरोसा करते थे

जहाँ एक से एक घटिया नेता है इस देश में, जिनके कारण लोगो का राजनेताओं पर से भरोसा ही उठ जाता है, ऐसे में मनोहर पर्रीकर एक उदाहरण थे

वो मुख्यमंत्री थे, पर बड़ी आसानी से किसी को भी मिलना हो तो मिल लेता था, वो साधारण तरीके से रहते थे, वो काम करने में यकीन रखते थे, वो बहुत ही सरल थे, उन्हें अपनी सत्ता और बड़े राजनेता होने का कभी कोई घमंड नहीं था
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उनकी सरलता का एक विडियो आप जरुर देखिये



वो ईमानदारी और सरलता की मिसाल थे, और उनको देख कर लोगो में एक भरोसा रहता था, पर अब वही मनोहर पर्रीकर हमे छोड़ गए


काफी लम्बे समय से मनोहर पर्रीकर कैंसर से लड़ रहे थे, आज 17 मार्च को शाम को 7.30 बजे वो इस दुनिया से चले गए

हम सबको वो रुलाकर चले गए, उनके जैसा सरल और इमानदार नेता मिलना बहुत ही रेयर होता है और आज देश ने एक बड़ा हीरा खो दिया जो अनमोल था


कैंसर से लड़ते हुए भी पर्रीकर करते थे अपना कर्म
वो कर्मठ थे, वो लम्बे समय से कैंसर से लड़ रहे थे फिर भी वो जनता के लिए कार्य कर रहे थे, वो एक शेर की तरह थे, उनका ह्रदय मजबूत थे, और उन्होंने भारत के रक्षामंत्री के रूप में भी एक अद्भुत कार्य किया था


मनोहर पर्रीकर आज हमे छोड़ गए, और हमे अब उनकी यादों के सहारे ही इस दुनिया में रहना पड़ेगा, पर उनकी आत्मा तो अजर है अमर है, अगर उनकी आत्मा हमारी बात सुन रही है तो हम विनती करते है की इस भारत देश को उनकी जरुरत है, उनके जैसे सरल और इमानदार नेता की इस देश को सख्त जरुरत है और हो सके तो वो किसी भी रूप में इस देश में वापस आयें, ॐ शांति शांति शांति
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