"कैसा करवाचौथ???" (भावनाओं का शिकंजा...) :- डॉ प्रियंका "हम है ना"

💐🇮🇳💐जय भारत💐🇮🇳💐🙏🙏🙏साथियों🙏🙏🙏💐🇮🇳💐

""ब्रम्हाण्ड है अपना परिवार...
मानवीय गुण रहे...
ना रहे कोई विकार...
"सम्पूर्ण राष्ट्र" करे;
"भारत" का नमन स्वीकार...।।""

"सम्पूर्ण राष्ट्रों" को...अंतःकरण की असीम गहराईयों से "भारत" नमन करता है...।
   💐🙏🇮🇳🌏🇮🇳🙏💐


       "कैसा करवाचौथ???"
   (भावनाओं का शिकंजा...)

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ये है कैसा करवाचौथ...???
ये है कैसा करवाचौथ...???


पति के हाथों पिटती जाए...
कोख़ में अजन्मी मारी जाए...
फिर भी फ़रेबी उम्मीदों में...
नारी तू क्यूँ है मदहोश...???


बेतुका ये करवाचौथ...
ये है कैसा करवाचौथ...???


वो ज़िम्मेदारी से नाकारा है...
वो प्यार के नाम पे आवारा है...
कोठों पे जानें से... रिश्तों पे...
कालिख़ लगानें से नहीं करता   वो अफ़सोस...।।


नारी अब ना कर तू करवाचौथ...
ये है कैसा करवाचौथ...???


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नारी के कर्तव्यपरायण होनें पर भी...
नारी को क्यों दोषी बनाते हो...???
दहेज़ का चक्रव्यूह क्यों नारी के चहुँओर सजाते हो...???
रिश्तों के नाम पे क्यों हो एहसानफ़रामोश...???


छल-दम्भ भरा ये करवाचौथ...
ये है कैसा करवाचौथ...???


नारी तुझे अपनीं बातें कहना है...
अब ना यूँ चुप रहना है...
छोड़ ढोना कुरीति-पाखण्ड...
अब ना कर तू कोई संकोच...।।


छोड़ दे दोहरे मापदंड का करवाचौथ...
ये है कैसा करवाचौथ...???

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पंचशील पथ का जीवनसाथी हो...
नारी हो साथी के माथे का तिलक...
जो पंचशील की राह नहीं...तो...
किस बात का करवाचौथ...???


बोलो  !  कैसा करवाचौथ...???
नहीं चाहिए खोखला करवाचौथ...।।


मेंहदी-चूड़ी-बिछुआ-कंगन के...
साज-श्रृंगार में...सखी;
ना गवां तू अपना जीवन...
साथी संग कर तू राष्ट्र को नित नमन...।।


ऐसा सजीला हो करवाचौथ...
हाँ; ऐसा ही हो करवाचौथ...।।


माफ़ करना मेरे जीवनसाथी...
हैं हम-तुम दोनों "दीया-बाती".
पर नहीं करूँगीं तेरे लिये...
अब मैं कोई व्रत-प्रदोष...।।

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छोड़ दिया अब करवाचौथ...
नहीं करना मुझको करवाचौथ...।।


अब समझो मेरे जीवनसाथी...
पथरीले-पथ पर उमंग संग...
आजीवन तेरे संग चलूँगी...
धूप में शीतल बयार बनीं रहूँगीं...।।


पर;अब...नहीं करूँगी...नहीं करूँगीं...
आडम्बरयुक्त ये करवाचौथ...।।


तेरी राहों के काँटों को...
अपनीं पलकों से चुन लूँगीं...
राष्ट्रपथ पर तेरे संग चलूँगीं...
मानवता की ख़ातिर मैं खुद को अर्पण कर दूँगीं...।।


सुन ले...ओ...मेरे जीवनसाथी !!!
यही है मेरा करवाचौथ...।।


ऐसा ही हो करवाचौथ...
तुम "दीया" मैं दीये की "ज्योत"....
"संकल्प-शक्ति" का करवाचौथ...
जीवन हो "करुणा-प्रेम" से ओतप्रोत...।।


ऐसा ही हो अपना करवाचौथ...
ऐसा ही हो अपना करवाचौथ...।।


"संकल्प-शक्ति" का करवाचौथ...
"गृहस्थ-आश्रम" में रहे "संतोष"...
"गृहस्थ-आश्रम" में रहे "संतोष"...
"गृहस्थ-आश्रम" में रहे "संतोष"...


सखियों !!!

""पाखण्ड की बेड़ियों को तोड़ते हुए...
रिश्तों को समर्पण की भावनाओं से सींचते हुए...
गृहस्थ-आश्रम की नींव मज़बूत करते हुए...
संकल्पित-संस्कारों संग बढ़ चलें""....


""रीति समझ में आती है...
कुरीति हमें नहीं भाती है""...

br />""सुसंस्कृति-सुसंस्करों की नयी इबारत रचनें""...

आ...अब...सभी मिलकर चलें...विश्वपटल की ओर...

🇮🇳🌏🇮🇳🌏🇮🇳🌏🇮🇳🌏🇮🇳

        आपके परिवार की
        अपनी बेटी-

         डॉ. प्रियंका"हम हैं ना"
              9450182942
           सक्रिय समूह भारत
   🌈🔥जागृत भारत🔥🌈

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