"मानवता का महल" (अपना भव्य सुरम्य संसार..) :- डॉ प्रियंका "हम है ना"

💐🇮🇳💐जय भारत💐🇮🇳💐🙏🙏🙏साथियों🙏🙏🙏💐🇮🇳💐

""ब्रम्हाण्ड है अपना परिवार...
मानवीय गुण रहे...
ना रहे कोई विकार...
"सम्पूर्ण राष्ट्र" करे ;
"भारत" का नमन स्वीकार...।।""

"सम्पूर्ण राष्ट्रों" को...अंतःकरण की असीम गहराईयों से "भारत" नमन करता है...।
  💐🙏🇮🇳🌏🇮🇳🙏💐

साथियों,मेरी संकल्पना है...मानवता का "सुरम्य संसार" बसानें की...जहाँ मानवता का "भव्य विशाल महल" होगा...करुणा से ओतप्रोत जन-जन का जीवन होगा...कुछ ऐसा ही होगा अपना "सुरम्य संसार"...अपना "सुरम्य संसार"...
स्वागत करती हूँ आप सबका...आपके अपनें "सुरम्य संसार" में...
💐🇮🇳💐🙏🙏🙏💐🇮🇳💐

        "मानवता का महल"
(अपना भव्य सुरम्य संसार..)


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"मानवता का महल" भव्य विशाल है...
मैनें मानवता का "सुरम्य संसार" सजाया है...।।


तू डगमग ना कर...
दृढ़ता से रख पग...
आ...आ जा तू साथ मेरे...
मैनें सबको "अंतःकरण" से अपनाया है...।।


"मानवता का महल" भव्य विशाल है...
मैनें मानवता का "सुरम्य संसार"सजाया है...।।


ग़र "साहस"तेरे साथ है तो;
डरनें की कोई बात नहीं...
"निडरता" संग "यथार्थ" भरे जीवन में...
मैनें "आत्मविश्वास" का बिगुल बजाया है...।।


"मानवता का महल" भव्य विशाल है...
मैनें मानवता का "सुरम्य संसार" सजाया है...।।


सहनशीलता-धैर्य-विनम्रता संग...
तू मानवता के पथ पर अविरल चल...
राहों का पत्थर भी मोम-सा जाएगा पिघल...
मैनें उदास मन में "अन्तर्मन की शक्ति" जगाया है...।।


"मानवता का महल" भव्य विशाल है...
मैनें मानवता का "सुरम्य संसार" सजाया है...।।


बाट जोहती हूँ मैं सबका...
पल-पल करके,प्रतिदिन-निसदिन...
साथ मेरे "गुरु वक़्त्त" का सम्बल है...
मैनें मानवता की राहों में "पलकों" को बिछाया है...।।


"मानवता का महल" भव्य विशाल है...
मैनें मानवता का "सुरम्य संसार" सजाया है...।।


स्वरलहरी मानवता की...
गूँजती है,मेरे कानों में प्रतिपल...
मानवता के "साज़-आवाज़" संग...
मैनें अपनें "वृहत विशाल कुटुम्ब" को गले से लगाया है...।।


"मानवता का महल" भव्य विशाल है...
मैनें मानवता का "सुरम्य संसार" सजाया है...।।


मैनें सबकी ख़ातिर,मानवता का...
"सुरम्य संसार" बसाया है...
"सुरम्य संसार" बसाया है...
"सुरम्य संसार" बसाया है...


""भव्य महल की दीवारें...
   मेरे संग गुनगुनाती हैं...
   मानवता के गीत गाती हैं...
   मेरे "अन्तर्मन" में शक्ति संचार कर जाती हैं...।।""   


""मैं गुनगुनाती हूँ...मैं मुस्कुराती हूँ...
"आत्मविश्वास" जगाती हूँ...
प्रकृति प्रदत्त उपहार को...
सबके जीवन में बाँट आती हूँ...।।""


""अब आ भी जा...चल "सुरम्य-संसार" की ओर चलें..."" 

आ...अब...सभी मिलकर चलें...विश्वपटल की ओर...
🇮🇳🌏🇮🇳🌏🇮🇳🌏🇮🇳🌏🇮🇳
      आपके परिवार की
      अपनी बेटी-
        डॉ.प्रियंका"हम हैं ना"
             9450182942
         सक्रिय समूह भारत
   🌈🔥जागृत भारत🔥🌈
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